tag:blogger.com,1999:blog-30371899.post6646166635559061497..comments2008-03-25T15:07:22.173+05:30Comments on हिन्द-युग्म: जोगीरा सा रा रारा......निखिल आनन्द गिरिhttp://www.blogger.com/profile/16903955620342983507noreply@blogger.comBlogger15125tag:blogger.com,1999:blog-30371899.post-66660832285304001602008-03-25T15:07:00.000+05:302008-03-25T15:07:00.000+05:30डा. रमा द्विवेदी said... समकालीन यथार्थ की सुन्दर...डा. रमा द्विवेदी said...<BR/><BR/> समकालीन यथार्थ की सुन्दर अभिव्यक्ति.....बधाई..Ramahttp://www.blogger.com/profile/10010943809475838010noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-30371899.post-68181556501706291072008-03-24T14:13:00.000+05:302008-03-24T14:13:00.000+05:30बहुत बढिया...बहुत बढिया...Bhupendra Raghavhttp://www.blogger.com/profile/05953840849591448912noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-30371899.post-8268601385909836632008-03-24T13:21:00.000+05:302008-03-24T13:21:00.000+05:30एक तरफ़ हैं चाँद पर, इंसानों के पाँव,और इधर अंधेर ...एक तरफ़ हैं चाँद पर, इंसानों के पाँव,<BR/>और इधर अंधेर में, सदियों से हैं गाँव....<BR/>वाह निखिल जी वाह...बहुत खूब लिखा है आप ने.<BR/>दुष्यंत जी का एक शेर याद आ गया:<BR/>"कहाँ तो तय था चिरागाँ हर एक घर के लिए<BR/>यहाँ चिराग मय्यसर नहीं शहर के लिए "<BR/>आप की पूरी रचना ही समसामयिक है और सूचने को मजबूर करती है. ऐसे विलक्षण रचना के लिए बधाई.<BR/>नीरजनीरज गोस्वामीhttp://www.blogger.com/profile/07783169049273015154noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-30371899.post-26686822277962457492008-03-24T10:40:00.000+05:302008-03-24T10:40:00.000+05:30"जोगीरा सा रा रा रा....." तुम्हारे व्यंग्य की धार ..."जोगीरा सा रा रा रा....." तुम्हारे व्यंग्य की धार पैनी है। तुम्हारी अपार क्षमताओं के अनुरूप रचना..<BR/><BR/>*** राजीव रंजन प्रसादराजीव रंजन प्रसादhttp://www.blogger.com/profile/17408893442948645899noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-30371899.post-61215159036550347092008-03-23T22:55:00.000+05:302008-03-23T22:55:00.000+05:30सौ करोड़ के देश में, रखें विदेश कोच...दिल्ली आकर खो...सौ करोड़ के देश में, रखें विदेश कोच...दिल्ली आकर खो गए, शब्द , भावना, गीत,<BR/>त्योहारों पर कभी-कभी, याद आए मनमीत...जोगीरा सा रा रा रा.....<BR/><BR/>वाह क्या खूब ...!व्यंगात्मक दोहे ...!मजा आ गया ..sunita yadavhttp://www.blogger.com/profile/00087805599431710687noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-30371899.post-61019702875591429852008-03-23T16:22:00.000+05:302008-03-23T16:22:00.000+05:30अति सुंदर व्यंग्यात्मक कविता ,हम टू आपके साथ मलकर ...अति सुंदर व्यंग्यात्मक कविता ,हम टू आपके साथ मलकर यही कह सकते है <BR/>जोगीरा सा रा रारा <BR/>जोगीरा सा रा रारा ......सीमा सचदेवseema sachdevahttp://www.blogger.com/profile/15533434551981989302noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-30371899.post-1956308309290986802008-03-23T12:36:00.000+05:302008-03-23T12:36:00.000+05:30मजा आ गया निखिल भाई।मजा आ गया निखिल भाई।तपन शर्माhttp://www.blogger.com/profile/02380012895583703832noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-30371899.post-50073892679630963062008-03-23T12:28:00.000+05:302008-03-23T12:28:00.000+05:30'आँगन मेरे गाँव का, शहरी फ्लैट से बीस,तिलक बराबर ह...'आँगन मेरे गाँव का, शहरी फ्लैट से बीस,<BR/>तिलक बराबर हो गई, पहली क्लास की फीस'<BR/><BR/>बहुत खूब अंदाज़ हैं !<BR/>सुंदर!Alpana Vermahttp://www.blogger.com/profile/08360043006024019346noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-30371899.post-23328996848434929422008-03-23T11:07:00.000+05:302008-03-23T11:07:00.000+05:30वाह निखिल जी आपने तो कमाल का लिखा है हर पंक्ति , श...वाह निखिल जी आपने तो कमाल का लिखा है <BR/>हर पंक्ति , शब्द बोलता है <BR/>पसंद आया आजकल की समस्याओं का बखूबी वर्णन <BR/>किया है आपने <BR/>बधाईanjuhttp://www.blogger.com/profile/05253751080116301279noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-30371899.post-45613297032993445242008-03-23T10:57:00.000+05:302008-03-23T10:57:00.000+05:30भई वाह...........भई वाह...........anuradha srivastavhttp://www.blogger.com/profile/15152294502770313523noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-30371899.post-14250443292378593232008-03-23T09:54:00.000+05:302008-03-23T09:54:00.000+05:30बहुत सुंदरबहुत सुंदरmehekhttp://www.blogger.com/profile/16379463848117663000noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-30371899.post-86726573344057048572008-03-23T09:11:00.000+05:302008-03-23T09:11:00.000+05:30भाई वाह ...... सा रा रा रा, सा रा रा रा, सा रा रा...भाई वाह ...... सा रा रा रा, सा रा रा रा, सा रा रा रा, हो जोगीरा सा रा रा रा. मज़ा आ गया.मीतhttp://www.blogger.com/profile/06968972033134794094noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-30371899.post-68249773191880064792008-03-23T09:05:00.000+05:302008-03-23T09:05:00.000+05:30वाह! कमाल के दोहे है निखिल जी आज कल दोहे बहुत कम ल...वाह! कमाल के दोहे है निखिल जी आज कल दोहे बहुत कम लिखे जा रहे हैं ऐसे मे आप्की कलम से निकले इन दोहों को पड्कर मज़ा आ गयाबरबाद देहलवीnoreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-30371899.post-84098611186910738862008-03-23T07:23:00.000+05:302008-03-23T07:23:00.000+05:30जोगीरा सा रा रारा.....किसी दिन मंडली बना कर बैठते ...जोगीरा सा रा रारा.....<BR/>किसी दिन मंडली बना कर बैठते हैं और मिल कर गाते हैं इसे.....सजीव सारथीhttp://www.blogger.com/profile/08906311153913173185noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-30371899.post-50274536370531710392008-03-23T00:54:00.000+05:302008-03-23T00:54:00.000+05:30निखिल जी हमेशा की तरह मस्त कर दिया आपने | बहुत खूब...निखिल जी हमेशा की तरह मस्त कर दिया आपने | <BR/>बहुत खूब... यह पंक्तियाँ बहुत पसंद आईं <BR/><BR/>"एक तरफ़ हैं चाँद पर, इंसानों के पाँव,<BR/>और इधर अंधेर में, सदियों से हैं गाँव"vipulhttp://www.blogger.com/profile/13962852081810792299noreply@blogger.com