Tuesday, February 26, 2008

पाठ क्रमांक -9 काफिये को लेकर कुछ और बातें

 पाठ क्रमांक - 9 काफिये का समापन करने की और बढ़ते हैं हम आज

आज का दिन मेरे लिये काफी भावुकता का दिन है मेरे सबसे अच्‍छे कवि मित्र सुकव‍ि श्री मोहन राय ने पिछले साल आज के ही दिन जाने क्‍यों अपने आप को समाप्‍त कर लिया था । एक साल बीत गया है पर पता ही नहीं चला कि एक साल हो गया है त्र आज उनकी पुण्‍यतिथि है और आज शाम को मैंने उनकी स्‍मृति में एक आयोजन भी रखा है आप सभी भी सादर आमंत्रित हैं ।
खैर चलिये काफिया समापन आज करना है ताकि फिर हम आगे की दिशा में बढ़ सकें
कुछ और मात्राएं जो रह गईं हैं वो ये हैं , ऊं, , एं, , ओं,
1: अहमद फ़राज़ साहब का शे' है
क्या ऐसे कम सुख़न से कोई गुफ़्तगू करे
जो मुस्तकिल सूकूत से दिल को लहू करे
अब तो ये आरज़ू है कि वो ज़ख् खाइये
ता जि़न्दगी ये दिल कोई आरज़ू करे
अब यहां पर को ही काफिया बनाया गया है और उसके अनुसार ही शे'र निकाले जा रहे हें ।
2 : लेकिन ये भी हो सकता है कि को अं की मात्रा के साथ संयुक् कर दिया गया हो उस हालत में आपको काफिये वैसे ही ढूंढने होंगें
हालंकि इस तरह के उदाहरण कम हैं और अगर हैं भी तो उनमें ऊं खुद ही मौजूद है
कितने पिये हैं दर्द के आंसू बताऊं क्या
ये दास्ताने ग़म भी किसी को सुनाऊं क्या
न्‍यू जर्सी अमेरिका में रहने वालीं बी नागरानी देवी की ये ग़ज़ल है
दीवानगी में कट गए मौसम बहार के
अब पतझरों के खौफ से दामन बचाऊं क्या
अब यहां पर तो है पर अं के साथ है इसलिये आपको उसको निभाना पडे़गा ही
3 : जब किसी एक ही अक्षर के साथ मतले में रहा हो
जैसे
ऊपर का मतला ही अगर ऐसा होता
ख़ुद को गवां के कौन तेरी जुस्तजू करे
ता-जि़न्दगी ये दिल कोई आरज़ू करे
अब इसमें आप फंस गए हैं क्‍योंकि आपने ऊ को ज़ के साथ संयुक्‍त कर दिया है अब आपको काफिये ऐसे ही लेने होंगें जिनमें ज़ू हो या जू हो । मसलन आरज़ू, जुस्‍तज़ू, वुज़ू आदि
4 : दोहराव का मामला
नागरानी जी की गज़ल़ में जो बात है वो ये भी है कि वहां पर काफिया दरअस्‍ल में 'आउं' है ये दोहराव का मामला है आपने मतले में ऊं के पहले एक ख़ास अक्षर का दोहराव कर लिया है जो की मात्रा है अब आप को उसको निभाना ही है ।
और जो कहीं आपने और ज्यादा कुछ कठिन कर लिया तो वो ये होगा कि आपने एक अक्षर की भी बंदिश बांध ली
जैसे
कितने पिए हैं दर्द के आंसू बताऊं क्या
ये दास्ताने ग़म से किसीको सताऊं क्या
अब आप बुरी तरह से फंस गए हें क्‍योंकि आपने 'ताऊं' की बहुत मुश्किल बंदिश ले ली है जिसको निभाना बहुत मुश्किल हो जाएगा ।
पिछले पाठ में हमने देखा था कि शब्‍दों का काफिया मात्रा   का काफिया और मात्रा   का काफिया किस प्रकार निभाया जाता है । आज हमने देखा कि और   के काफिये को किस प्रकार निभाना है । काफिया को लेकर सबसे ज्‍यादा ग़लतियां हम करते हैं और इसलिये ही मैं इस पर ज्‍यादा काम कर रहा हूं । एक बार ये ठीक हो जाए तो फिर तो सब ठीक हो जाएगा ।


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12 पाठकों का कहना है :

नीरज गोस्वामी का कहना है कि -

पंकज जी
बहुत बढ़िया जानकारी.
आप को सुबह सुबह यहाँ देख के तबियत खुश हो गयी, लगता है की गम के बादलों को चीर के आप के आँगन में सूरज निकल आया है फ़िर से.
नीरज

राजीव रंजन प्रसाद का कहना है कि -

सुबीर जी,
श्री मोहन राय जी को युग्म-परिवार की ओर से भी विनम्र श्रद्धांजलि। संभव हो तो उसकी कुछ रचनायें युग्म के पाठकों को भी पढने का अवसर प्रदान करें।

अब शिष्यों की परीक्षा लेने का वक्त भी आ गया है...।

*** राजीव रंजन प्रसाद

sahil का कहना है कि -

पंकज सर,बहुत ही अच्छी जानकारी दी आपने,और मोहन जी के प्रति हम श्रद्धा के फूल अर्पित करते हैं,भगवन उनकी आत्मा को शान्ति दे,
आलोक सिंह "साहिल"

बरबाद देहलवी का कहना है कि -

बहुत बहुत शुक्रिया सुबीर जी आप युं ही जानकारी देते रहिये बहुत फ़ायदा पहुंचता है नये गज़लकारों को।
श्री मोहन राय जी को श्रद्धांजलि। भगवान उनकी आत्मा को शान्ति प्रदान करे।

tanha kavi का कहना है कि -

पंकन जी,
श्री मोहन राय जी को मेरी तरफ से भी अश्रुपूर्ण एवं विनम्र श्रद्धंजलि।
आज भी आपने बहुत हीं उपयोगी जानकारियाँ दी हैं। राजीव जी की तरह मैं भी कहूँगा कि अब आप शिष्यों की परीक्षा लेनी शुरू कर दें। तब हीं तो पता चलेगा कि क्लास में विद्यार्थी सीरियस हैं कि नहीं ।

-विश्व दीपक ’तन्हा’

mehek का कहना है कि -

मोहन जी को हमारी तरफ़ से भी श्रद्धा सुमन अर्पित,काफिये की जानकारी के लिए शुक्रिया

hemjyotsana का कहना है कि -

सुन कर अफ़सोस हुआ । हमारी तरफ़ से भी श्रद्धा सुमन अर्पित हैं ।

अब आगे क्या पढाने वाले सर जी ?

tanha kavi का कहना है कि -

गलती से पंकज के बदले पंकन लिख दिया है। माफ कीजिएगा।

पंकज सुबीर का कहना है कि -

सभी को धन्‍यवाद और आभार । जहां तक परीक्षा की बात है हम अगली कक्षा में काफिया समापन कर लेंगें और फिर तो परीक्षा प्रारंभ होनी ही हैं ।

सजीव सारथी का कहना है कि -

सचमुच काफिये की गलतियाँ बहुत होती है, आपने सब कुछ इतनी बारीकी से समझाया है कि, पुराना लिखा हुआ सब ख़राब लगने लगा है, हाँ अच्छी बात यह है कि आगे जो लिखेंगे इसमे और शुद्धता आएगी,

RAVI KANT का कहना है कि -

अब काफिया तो कम से कम सुधर ही जायेगा।

DR.ANURAG ARYA का कहना है कि -

वाकई नाजुक मसला पकड़ा आपने . .आपके मित्र के बारे मी पढ़कर दुःख हुआ

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